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जिंदगी-एक सवाल

में आपही की तरह एक इंसान हूँ । मैंने  इस  जिंदगी में बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं और प्रयत्न आज भी जारी किये हूँ। सोचता हूँ और इंतजार करता हूँ कि क्या कोई मुझे मेरे नाम से कभी पुकारेगा ? इस जगह पर खड़ा उन लोगो को ढूंढ़ता रहता हू जो मुझे मेरा बनकर समझे। कभी किसी के विश्वास को ठेस नहीं पहुंचाई न ख्वाहिश बहुत बड़ी है पर फिर भी बिना किसी वजह जब लोग मुझ पर विशवास न करें और मेरी हैसियत के आधार पर मेरा चुनाव या तिरस्कार करें तो बहुत दर्द होता है। और जब यह बार बार होता आ रहा हो तो आप जिंदगी से पलटकर कुछ सवाल करते हैं मैंने भी अपनी ज़िन्दगी से बहुत सवाल किये पर ज़िन्दगी या तो मुझसे पूरी तरह रूठ चुकी है या दुनिया की भीड़ में मुझे अब भुला ही बैठी हो। सवाल बहुत हैं। इंतज़ार आज भी उस दिन का है जब उसके कानों में मेरी आवाज दस्तक दे. कभी बारिश में खड़ा हो जाता हू  कभी धूप में खड़ा इंतज़ार करता हू और यही सवाल करता हूँ "ऐ जिंदगी इम्तेहान अभी और कितने बाकी हैं ?" सोचता हूँ कि जिंदगी के सवाल मैं चुरा सकूँ और देख सकूँ उ...